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नवरात्रो में स्वास्थ्य- रवि कुमार शर्मा

Health in Navratri- Ravi Kumar Sharma

नवरात्र के पीछे का वैज्ञानिक आधार यह है कि पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा काल में एक साल की चार संधियां हैं जिनमें दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणुओं के आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं। अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए तथा शरीर को शुद्ध रखने के लिए और तन-मन को निर्मल और पूर्णत: स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम ‘नवरात्र’ है जिस का धार्मिक,आध्यात्मिक, लौकिक और शारीरिक दृष्टि से बड़ा महत्व है।

नवरात्र पर्व हमेशा चैत्र और आश्विन मास में ही होते हैं इसका एक वैज्ञानिक कारण है । मौसम विज्ञान के अनुसार यह दोनों मास सर्दी और गर्मी की संधि पर पड़ने के कारण अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। शीत ऋतु का आगमन अश्विन मास से आरंभ हो जाता है और. ग्रीष्म ऋतु का चैत्र मास से , यह एक संधि काल है इसलिए हमारे स्वास्थ्य पर इनका विशेष प्रभाव पड़ता है । शरीर में वात पित्त और कफ तीनों पर प्रभाव पड़ता है । यह कारण है इस संसार के अधिकांश रोगी इन दोनों मास में या तो अच्छे हो जाते हैं या फिर मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं |

जैसे ही एक ऋतु खत्म होती है प्रकृति में एक हलचल प्रारंभ होने लगती है । पेड़ पौधे, वनस्पति, जगत, जल, आकाश और वायुमंडल सभी में परिवर्तन होने लगता है । जब ऋतु बदलती है तो नए अन्न को शरीर को देने से पहले हम शरीर को खाली कर लेते हैं जैसे एक बर्तन में नये प्रकार के भोजन से पहले बर्तन साफ कर लिया जाता है | जब हम उपवास करते हैं तो शरीर के पाचन तन्त्र को विश्राम मिलता है परंतु विश निष्कासान (toxins) की प्रक्रिया चलती रहती है जिसे शरीर में जमा सारा विष निकाल जाता है । अब जब हम फिर से अन्न ग्रहण करते हैं तो पाचन तन्त्र अधिक क्षमता से काम करता है । इसलिए शास्त्रों और आयुर्वेद में भी संधि काल के इन महीनों में शरीर को पूर्ण स्वस्थ रखने के लिए 9 दिन तब विशेष रूप से व्रत उपवास आदि का विधान किया है |
यदि ब्रह्मचर्य का पालन करते करते हुए इन नौ दिनों में विधि पूर्वक व्रत उपवास किया जाए तो आने वाले समय के लिए शरीर में नई शक्ति का संचार हो जाता है । इस कारण आगे आने वाले ऋतु परिवर्तन मैं किसी भी प्रकार का रोग और व्याधि से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है ।

उपवास के दौरान अन्न नहीं खाने के पीछे वैज्ञानिक कारण यह भी है कि हमारे शरीर के लिए कभी-कभी भूखा रहना भी फायदेमंद होता है। उपवास करने पर हम अनादि नहीं खाते हैं जिससे हमारे पाचन तंत्र को आराम मिलता है । व्रत के दौरान हम बहुत नियम से संतुलित खाना खाते हैं जो कि हमारी सेहत के लिए बहुत अच्छा रहता है |
व्रत में नियम के अनुसार खाने से कब्ज गैस इन डाइजेशन सिर दर्द बुखार आदि बीमारियों का असर कम हो जाता है। उपवास वजन घटाने का सबसे अच्छा प्रभावी तरीका है यह यह शरीर की संरचना को नियंत्रित करता है , शरीर के मेटाबोलिज्म प्रणाली को नियंत्रित करता है । इसलिए हम नवरात्रि में 9 दिन का व्रत उपवास करते हैं और शरीर को मजबूत बनाते हैं |

प्रायः देखा जाता है कि ज्योतिष के माध्यम से पता चलता है कि किस कारण से यह रोग हुआ है और उसका इलाज रत्न चिकित्सा या मंत्र चिकित्सा के माध्यम से किया जाता है। मंत्र भी सही मुहूर्त मे करने पर शीघ्रातिशीघ्र प्रभावशाली होते है। यही कारण है कि पुराने से पुराने असाध्य रोगो को भी नवरात्रो मे मंत्र चिकित्सा द्वारा ठीक कर पाना सम्भव होता है ।